गिर्जे के बारे मे
|
| अब ईसा मसीह के अंतिम दिनों के संतों के गिर्जे (जिसे संयोग से मॉर्मन गिर्जा भी कहा जाता है) के 1,300,000 से ज्यादा सदस्य दुनिया मे 160 देशों मे मौजूद हैं. 124 से ज्यादा खूबसूरत मंदिर कई स्थानों की शोभा बढाते है जो उत्तर, दक्षिण और मध्य अमेरिका, यूरोप, एशिया, अफ्रीका, और समुद्र के कई द्वीपों पर हैं. उस के सहायता और मानवतावादी प्रयासों ने दुनियाभर मे लाखों के जीवन मे आशिर्वाद लाए हैं, उन का जो भी विश्वास हो, क्योंकि वे उन के जीवित नेता ईसा मसीह का अनुकरण करते है. पर अफ्सोस है की मॉर्मन गिर्जे के बारे मे अब भी गलतफैमीयां प्रचलित है और उन के बारे मे कई कल्पित कथाएं और झूट प्रचलित है. हम आशा करते हैं की इस जगह उन्हे जानकारी मिल पाएगी जो मॉर्मनो के किसी एक विशय की जानकरी चाहते हैं या मॉर्मन लोगों के बारे मे सामान्य ज्ञान चाहते है. यहां के लेख कई विशयों की चर्चा करेते हैं जैसे, सामान्य मॉर्मन विश्वास, मॉर्मन सिद्धांत, मॉर्मन इतिहास और नेत्रुत्व, मंदिर कार्य, पारिवारिक जीवन, मॉर्मन साहित्य, विवादास्पद विषय, और गिर्जे की संस्थाए और मानवतावादी प्रयास.
|
प्रस्तुत मंदिर
|
एल.डी.एस नावू इल्लिनॉइझ मंदिर, © 2005 इंटलेक्चुअल रीझर्व, इंकॉर्प्रेटेड
अप्रैल 1999 के सार्वजनिक संमेलन की आखरी सभा मे ईसा मसीह के अंतिम दिनों के संतो के गिर्जे के प्रधान गोर्डन बी हिंक्ली ने ये घोषणा की: “मैं प्रभावित हुआ हुं ये घोषणा करने के लिए के जो मंदिर हम बनाने जा रहे हैं, उन मे हम दोबारा नावू का मंदिर भी बना रहे हैं. इस खबर का स्वागत खुशी और आंसुओं के साथ सदस्यों के साथ एल.डी.एस विश्वास न रखने वालों ने भी किया. दोबारा बना नावू मंदिर, एक स्मारक खड़ा रहेगा, ऊन अग्रगामी लोगों का, जिन्होंने बहुत पीड़ा सहन कर के उन के ईश्वर के किए एक सुन्दर घर बनाया, जिस के बनते ही उन्हे सर्दी के मौसम के बीच अपने घरों से भगाया गया था. (नवू मंदिर के बारे मे.)
|
|
|